* भारत के महामहिम राष्ट्रपतिजी से सम्मानित *
डॉ.राधा वल्लभ त्रिपाठी
राजगढ़ ही नहीं यह म.प्र.के लिए
भी गौरवान्वित होने का मौका था
जब डॉ.त्रिपाठी का सम्मान,दि.
२१/३/१५ को राष्ट्रपति महो.द्वारा
किया गया | "निपुणता तथा शास्त्र
में पांडित्य के लिए यह प्रमाणपत्र
प्रदान करता हूँ "- महामहिम
डॉ.त्रिपाठी का जन्म राजगढ़ में
डॉ.गोकुल प्रसाद त्रिपाठी के यहाँ
दि.१५/२/४९ को हुआ था |
एम.ए.,पी.एच.डी.,डी.लिट की
उपाधि श्रेष्ठता से प्राप्त कर वे
डॉ.हरि सिंह गौर वि.वि.सागर में
अध्यापन करते हुए विभागाध्यक्ष
अधिष्ठाता, और कार्य.कुलपति
जैसे पदों को सुशोभित किया |
भारतीय दूतावास, बेंकाक में
सलाहकार जैसे प्रतिष्ठित पद
पर रहे | सिल्पाकार्न वि.वि. में
अतिथि व्याख्यान देकर माँ
भारती का मान बड़ाया |लाल
बहादुर शास्त्री वि.वि.में कुलपति
पद पर कार्य किया |
एशियाटिक सोसा. बॉम्बे से स्वर्ण
अखिल भारतीय प्राच्य विद्या
पुरस्कार, कालिदास पुर., भोज
पुरस्कार, के.के.बिड़ला फाउ.
का शंकर पुर. हिन्दी साहित्य
सम्मेलन का 'महामहोपाध्याय'
अलंकरण, भवभूति पुरस्कार |
संस्कृत, हिन्दी में १५९ ग्रन्थों का
लेखन व प्रकाशन| २१६ शोध
ग्रन्थों का निर्देशन किया |
सागरिका, नाट्यम, और दूर्वा
पत्रिकाओं का वर्षों संपादन |
विदेशों में गंभीर विषयों पर
विद्वत्तापूर्ण, गरिमामय व्याख्यान
देकर सम्मान अर्जित किया |
चालीस से अधिक व्याख्यान
कोलम्बिया, नेपाल, भूटान,
जर्मनी,
वियेना, जापान, बेंकाक,
लाइपाजिन
आदि देशों में दे कर भारत का
मान बड़ाया| विश्व संस्कृत
सम्मेलन की अध्यक्षता की |
देश विदेश में अपनी विद्वत्ता
से जाने जाने वाले त्रिपाठीजी
सादगी, सरलता और विनम्र
व्यवहार के लिये अनुकरणीय
हैं| प्रतिष्ठित विद्वान ब्यावरा
के विश्व प्रेम मन्दिर में अपने
व्याख्यान भी उतनी ही सरलता
से देते हैं जितनी विद्वत्ता से
किसी गंभीर विचार विमर्श में
क्षेत्रों में विख्यात है| नरसिंहगढ़
के 'भारती-भवन' मेंआपका
परिवार सुव्यवस्थित है| राजगढ़
में डॉ.त्रिपाठी चिकित्सा क्षैत्र
में जाने जाते हैं| आपकी पत्नि
डॉ.सत्यवती, ब्यावरा के स्वनाम
धन्य शिवदत्त भारद्वाज की पुत्री
हैं | आपकी ज्येष्ट पुत्री लंदन
में चिकित्सक, एक पुत्री
अमेरिका में आर्कीटेक्ट पद पर
कार्यरत हैं छोटी पुत्री गायन के
क्षैत्र में एक स्थापित व्यक्तित्व
है |
हम राजगढ़ और ब्यावरा के
नागरिकगण डॉ.त्रिपाठी के
सम्मान से गौर्वान्वित अनुभव
करते हैं एवं उनके सुखद भावी
जीवन की कामना करते हैं |
~~~~इति वृत्तम्~~~~~
एस. के. शर्मा ,रिटा.प्राचार्य,२माता मंदिर
के पास .ब्यावरा (राजगढ़) म.प्र.