Saturday, 4 April 2015

डॉ.राधा वल्लभ त्रिपाठी का सम्मान

* भारत के महामहिम राष्ट्रपतिजी से सम्मानित *                                                                            
         डॉ.राधा वल्लभ त्रिपाठी
राजगढ़ ही नहीं यह म.प्र.के लिए
भी गौरवान्वित होने का मौका था
जब डॉ.त्रिपाठी का सम्मान,दि.
२१/३/१५ को राष्ट्रपति महो.द्वारा
किया गया | "निपुणता तथा शास्त्र
में पांडित्य के लिए यह प्रमाणपत्र
प्रदान करता हूँ "- महामहिम
डॉ.त्रिपाठी का जन्म राजगढ़ में
डॉ.गोकुल प्रसाद त्रिपाठी के यहाँ
दि.१५/२/४९ को हुआ था |
एम.ए.,पी.एच.डी.,डी.लिट की
  उपाधि श्रेष्ठता से प्राप्त कर वे
  डॉ.हरि सिंह गौर वि.वि.सागर में
  अध्यापन करते हुए विभागाध्यक्ष
  अधिष्ठाता, और कार्य.कुलपति
  जैसे पदों को सुशोभित किया |
  भारतीय दूतावास, बेंकाक में
   सलाहकार जैसे प्रतिष्ठित पद
   पर रहे | सिल्पाकार्न वि.वि. में
    अतिथि व्याख्यान देकर माँ
   भारती का मान बड़ाया |लाल
    बहादुर शास्त्री वि.वि.में कुलपति
    पद पर कार्य किया |
    एशियाटिक सोसा. बॉम्बे से स्वर्ण
    अखिल भारतीय प्राच्य विद्या
    पुरस्कार, कालिदास पुर., भोज
    पुरस्कार, के.के.बिड़ला फाउ.
    का शंकर पुर. हिन्दी साहित्य
    सम्मेलन का 'महामहोपाध्याय'
     अलंकरण, भवभूति पुरस्कार |
    संस्कृत, हिन्दी में १५९ ग्रन्थों का
    लेखन व प्रकाशन| २१६ शोध
    ग्रन्थों का निर्देशन किया |
    सागरिका, नाट्यम, और दूर्वा
    पत्रिकाओं का वर्षों संपादन |
    विदेशों में गंभीर विषयों पर
    विद्वत्तापूर्ण, गरिमामय व्याख्यान
    देकर सम्मान अर्जित किया |
    चालीस से अधिक व्याख्यान
    कोलम्बिया, नेपाल, भूटान,
    जर्मनी,
    वियेना, जापान, बेंकाक,
     लाइपाजिन
    आदि देशों में दे कर भारत का
    मान बड़ाया| विश्व संस्कृत
    सम्मेलन की अध्यक्षता की |
    देश विदेश में अपनी विद्वत्ता
    से जाने जाने वाले त्रिपाठीजी
    सादगी, सरलता और विनम्र
    व्यवहार के लिये अनुकरणीय
     हैं| प्रतिष्ठित विद्वान ब्यावरा
     के विश्व प्रेम मन्दिर में अपने
     व्याख्यान भी उतनी ही सरलता
     से देते हैं जितनी विद्वत्ता से
     किसी गंभीर विचार विमर्श में         
     क्षेत्रों में विख्यात है| नरसिंहगढ़
     के 'भारती-भवन' मेंआपका
     परिवार सुव्यवस्थित है| राजगढ़
     में डॉ.त्रिपाठी चिकित्सा क्षैत्र
     में जाने जाते हैं| आपकी पत्नि
     डॉ.सत्यवती, ब्यावरा के स्वनाम
     धन्य शिवदत्त भारद्वाज की पुत्री
      हैं | आपकी ज्येष्ट पुत्री लंदन
      में चिकित्सक, एक पुत्री
      अमेरिका में आर्कीटेक्ट पद पर
      कार्यरत हैं छोटी पुत्री गायन के
      क्षैत्र में एक स्थापित व्यक्तित्व
       है |
      हम राजगढ़ और ब्यावरा के
      नागरिकगण डॉ.त्रिपाठी के
      सम्मान से गौर्वान्वित अनुभव
      करते हैं एवं उनके सुखद भावी
      जीवन की कामना करते हैं |
       ~~~~इति वृत्तम्~~~~~

   एस. के. शर्मा ,रिटा.प्राचार्य,२माता मंदिर
    के पास .ब्यावरा (राजगढ़) म.प्र.
   

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