Saturday, 14 March 2015

कचरे का पहाड़ -भारत का एक अजूबा

भारत की राजधानी दिल्ली जहाँ लालकिला,कुतुबमीनार,जंतर-मंतर और कई विराट और सुन्दर ईमारतों के लिये प्रसिद्ध है. वहीं एक खास बात के लिये भी प्रसिद्ध है वह है कचरे क पहाड़.

गाजीपुर में हम जैसे ही प्रवेश करते हैं, कचरे का एक बड़ा पहाड़ दिखाई दैता है.यह वास्तव में दिल्ली वासियों द्वारा फेंके गये ढेर सारे कचरे, गंदी वस्तुएं, टूटे-फूटे सामान और कूटा कचरा, कूड़ा, मकान से निकले तमाम कार्बनिक और अकार्बनिक वेस्ट का मिलाजुला सामग्री का बड़ा पहाड़ बन गया है. दूर से देखने पर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यह कूड़ा और गंदगी का बना होगा. लेकिन इस पर मंडराते अनगिनत चील,गिद्ध ,कौए और अन्य मुर्दाखोर पक्षी और इस क्षैत्र के वातावरण में फैली दुर्गंध से शिघ्र ही समझ में आजाता है कि यह मात्र कूड़े का पहाड़ ही है.यह लगभग एक किलोमीटर के एरिया में फैला है.जो दूर-दूर से दिखाई देता है.लेकिन दिल्ली के लोग बड़े चतुर हैं.इस पहाड़ को अब एक सुन्दर और रम्य स्थान में बदला जा रहा है.एक हरियाली से भरी पहाड़ी जो कुछ ही वर्षों में हरीभरी और पिकनिक स्पॉट में बदल जाएगी.लगभग एक चौथाई स्थान के आधार पर सुन्दर घास उगाकर मनोहारी स्थान में बदला जाचुका है जहाँ की शोभा देखते ही बनती है.वह दिन दूर नहीं जब यहाँ लोग अपने व्यस्त जीवन से त्रस्त होकर कुछ समय के लिये अपनी थकान मिटाने और मनोरंजन के लिये आना प्रारम्भ कर देंगे.तब यह स्थान जो गंदगी और अभिशाप के रूप में प्रसिद्ध था एक खूबसूरत मनोरंजक जगह के रूप में प्रसिद्ध हो जावेगा.साथ ही देश,विदेश में गंदगी  से निबटान और भूमि के चक्रीकरण का एक नायाब उदाहरण बन कर उभरेगा.जिससे अन्ततः लोगों का गन्दगी और कूड़े के प्रति नजरिया बदलेगा और जनता में ट्रेचिंग ग्राउण्ड के लिये भूमि देने के प्रति आक्रोश में कमी आयेगी.मनुष्य के जीवन में निकृष्ट के लिये भी मोह उत्पन्न होगा और धारणा में बदलाव होगा.भारतीयों के मानस में इस कहावत की पुष्टि होगी "बीस वर्ष में कूड़े के भाग्य भी बदल जाते हैं" जय स्वच्छभारत .

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