राजस्थान के तीर्थराज पुष्कर में भगवान ब्रम्हा का प्रसिद्ध मन्दिर है.यह क्षैत्र मुख्य रूप से गुर्जर गौड़ ब्राम्हण समाज के लिये अत्यन्त पवित्र माना जाता है.प्राचीन गुर्जर प्रदेश में स्थित यह तीर्थ यहाँ के एक राजा गुर्जरकर्ण से सम्बन्ध रखता है.उनके लिये पुत्रेष्टि यज्ञ कराने वाले ऋषि अक्षपाद गौतम थे.इन्हीं गौतम ऋषि ने यज्ञ के द्वारा पुत्र की प्राप्ति राजा के कराई थी.
जमदग्नि भरद्वाजो विश्वामित्राणि गौतमः
वशिष्ट काश्यपायागत्या मुनयोगौत्र कारिणि (बौधायकल्प)
उक्त यज्ञ में १५६ शिष्य थे ८४यज्ञ करने बैठे तथा ७२ छोड़ (यज्ञ व्यवस्थामे)
गौतम ऋषि के शिष्य-वत्स,कौशिक,गौतम
शांडिल्य,भर्ग,मुद्गल,कश्यप,भारद्वाज,वशिष्टभृगु,पाराशर ये १२ थे.ऋषि गौतम की स्मृति में "गौतम तीर्थ" देवलिया जिला प्रतापगढ़ राजस्थान मेम स्थित है.राजा ने १५६ शिष्यों को १५६ ग्राम दिये,इन ग्रामों के नाम से कुलगौत्र 'आवंटक' हुए.गौड़ देश के ऋषि के कारण गौड़ और गुर्जर प्रान्त के होने से गुर्जर गौड़.(गौंडवाना के ब्राम्हण )इस प्रकार हम आमल्या ग्राम के जोशी थे अतः आमल्याजोशी कहलाये.
श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध के ४५ वें
अध्याय का ३१ वाँ श्लोक(१०/४५/३१)
अथो गुरूकुले वासमिच्छन्तानुषजग्मतुः
काश्यपं सान्दीपनिं नाम ह्यवन्तीपुरवसिनम
भगवान श्रीकृष्ण,उज्जयिनी निवासी कश्यप गौत्रोत्पन्न सांदीपनि के आश्रम में
विद्या अध्ययन के लिये गये.
इस प्रकार हम कश्यप गौत्र के ब्राम्हण हैं.
हमारे पूर्वज लगभग ६०० वर्षपूर्व नरसिंह
गढ़ स्टेट के सारंगपुर के ग्राम नारायण्या
सुल्तान्या में आये थे.आज भी हमारे गौत्र
के लोग वहाँ रहते हैं.वहीं पर एक श्रुति के
अनुसार पूर्वज को खेती करते समय एक
सोने का पात्र मिला,जिसकी सूचना पर राजा ने उन्हें बुलाया.खेत के एक पत्थर को रखकर उन्होंने सकुशल लौटने पर भैरूँ मानकर पूजन की.वर्तमान में धाकड़
समाज ने दो चबूतरे बनाकर छोटेपर हमारे
भैरव की स्थापना की.जहाँ मैं सपरिवार
पूजन कर चुका हूँ.
********श्री गौतमाय नमः**********
Monday, 23 February 2015
अक्षपाद गौतमऋषि परम्पराकेब्राम्हण
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