Tuesday, 13 January 2015

यादों के उस पार

शिवना नदी मन्दसौर(म.प्र.) में बहने वाली एक मंझौले कद की नदी है जो बारिश में अपना वैभव दिखाती है,किन्तु गरमी में कंजूसी दिखाती है.सन्  १९७१में अपनी सेवा के सिलसिले में उधर जाना हुआ था
मन्दसौर का प्राचीन नाम दशपुर है जो उसके प्राचीनता की याद दिलाता है.रेल से रतलाम और फिर मन्दसौर.लेकिन जाना तो कहीं और था.मन्दसौर और उसके आसपास का क्षैत्र लम्बे समय से  अफीम उत्पादन करने वाला इलाका है,जो इसकी गहरी कालीमिट्टी की प्रचूर उत्पादन शक्ति के कारण है उस समय तक पक्की सड़कें नहीं बनी थी .वर्षा के कारण गहरी कीचड़
हो जाती है.कच्चे रास्तों पर चलना कठिन होता है.जाना था भाउगढ़ कीचड़ सूख जाने से रोज ही नया रास्ता बनता था.बस निकलने से रास्ते में ऊँचे निशान बन जाते जो सूखकर रास्ता खराब कर देते हैं
सन्ध्या को एक गाँव पहुँचे.बस की मंजिल यही थी किन्तु भाउगढ.अभी दूर था
रात्रि विश्राम और भोजन के बाद दूसरे दिन मंजिल पर पहुँचे.मित्रों के साथ रहना तय हुआ,सुबह स्नान करने के लिये शिवना नदी पर पहुँचे.नदी का उद् गम कुछ आगे  है.नदी से साक्षात्कार कुछ "अजनार" से मिलना था जो ब्यावरा की स्नेही नदी है.
लगभग एक माह रहना पड़ा लेकिन रोज एक घण्टा नदी के सानिध्य में रहने का आनन्द लिया.खूब खाना ,खूब पढ़ाना और सन्ध्या को बेडमिन्टन,चेस या बालीबॉल खेलना.मस्त दिनचर्या थी.भाउगढ़ था तो छोटा सा दैहात,किन्तु प्रचूर दूध होता था
इसीलिये वहाँ का "कलाकन्द" और खोआ
प्रसिद्ध था.जो मन्दसौर की यात्रा में दुकानों पर 'यहाँ भाउगढ़' का कलाकन्द मिलता है से ज्ञात हुआ.शिवना के पावन तट विशाल पशुपतिनाथ मन्दिर है.भारत का एकमात्र मन्दिर.भव्य ९फुट ऊँची विशाल मूर्ति.एक पुरूष के आलिंगन में नहीं आपाती.मन्दिर के पुजारी नागदा ब्राम्हण होते हैं,जिन्होनें प्रसिद्ध नागयज्ञ में भाग लिया धा.पास ही राजस्थान की सीमा पर प्रसिद्ध 'गौतमेश्वर'मन्दिर है जो लगभग २०० फुट गहरी गुफा में स्थित है.मालवा के प्रसिद्ध'लड्डूहाफले'के भोजन के साथ 'गुलकन्द'खाने का विधान है जो मिट्टी के बने कुल्हड़ में भांग से बना होता है.भोजन के बाद मन्दिर दर्शन.ऊपर गुफा में शिखर पर एक परिक्रमा लुड़क कर करने से गधे की योनि में जन्म नहीं होता.भगवान बुद्ध की छोटी प्रतिमा पेड़ के कोटर में कै़द है.एक शिलालेख के अनुसार जब आतताई औरंगजेब ने यहाँ आक्रमण किया तो मधुमक्खियों के हमले से पस्त होकर मन्दिर को दान दिया था
अचानक चक्करआने लगे.भांग का असर था और रंग जमाया था गधे की योनि से बचने की परिक्रमा ने.खूब हँसे और यात्रा का परमानन्द.....
..........   ..........   ॐ.   .....,.   ........
S.k.sharma...."अनुश्रवण"
़़ 31/D,s.f.s. flares,mayur vihar New Delhi.

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